दियाळी री घणी-घणी राम-राम सा! मां लिछमी थांरै घर पधारै अर सदा रो वासो करै।
Regional collection
Five voices of Rajasthan
The source groups twenty wishes under each regional variety. The wording includes place names, foods, temples, landscapes and local forms of greeting that give each section its own character.
अजोध्या में राम पधार्या, घर-घर दीया जग्या : वो ई उछाव आज थांरै आंगणै उतरै। दियाळी री बधाई!
धोरां री धरती माथै दीयां री जोत, थांरै जीवण में हरख री छोळ : सुभ दियाळी!
लिछमी-गणेस री पूजा फळै, थांरै घर सुख-संपत रा भंडार भरै। दियाळी री मंगळकामना।
मेहरानगढ़ ज्यूं ऊंचो थांरो मान, अर दीयै ज्यूं उजळो थांरो नाम : दियाळी री घणी बधाई सा!
नूंवा बही-खाता, नूंवी कळम, नूंवो उछाव : थांरै लाभ रो खातो सदा भरियो रैवै।
मांडणा सूं सजियो आंगणो, तोरण सूं सजियो बारणो : थांरै घर लिछमी जी रो सुवागत होवै।
काजू-कतली, मावै री बरफी अर अपणां रो हेत : मीठी दियाळी री मीठी बधाई!
अमावस री रात भी दीयां सूं पूनम बण जावै : थांरी हर मुसकल इयां ई चानणै में बदळ जावै।
आखै बरस री मैनत रो फळ इण दियाळी थांरी झोळी में भरपूर आवै। राम-राम सा!
बीकाणै री भुजिया ज्यूं चटपटो जीवण अर रसगुल्लै ज्यूं मीठो मन : दियाळी मुबारक!
दादोसा रो आसीस, मायड़ रो लाड़ : दियाळी रा दीया इणां सूं ई जगमगावै।
परदेस बसिया मारवाड़ी भायां नै : थे जठै भी हो, मरुधर री माटी री सोरम थांरै साथै है। दियाळी री बधाई!
एक दीयो थांरी किसमत रो, एक थांरी सेहत रो, एक थांरै परिवार रै हेत रो : तीनूं सदा जगता रैवै।
लिछमी जी रा पगलिया थांरै घर आवै अर कदै ई पाछा नीं जावै : सुभ दियाळी सा!
फटाकां री गूंज ज्यूं थांरी सफळता री धूम आखै देस में होवै।
सगळा गिला-सिकवा भूल'र आज गळै मिळां : दियाळी तो हेत रो तिंवार है।
थांरै आंगणै खुसियां रो मेळो, थांरै हियै सांति रो डेरो : दियाळी री घणी बधाई।
दीयो माटी रो, पण उजास आभै ताईं : थांरा सुपना भी इयां ई ऊंचा उठै।
म्हारै कानी सूं थांनै अर थांरै आखै परिवार नै सुभ दियाळी अर नूंवै बरस री राम-राम सा!
खम्मा घणी हुकुम! दीवाळी री घणी-घणी बधाई : एकलिंगनाथ जी री किरपा थां माथे सदा बणी रेवे।
पिछोला री लहरां में दीवा री जोत झिलमिल करे : थारो जीवण भी यूं ई चमकतो रेवे।
श्रीनाथजी रा अन्नकूट री सोरम थारे घर ताईं पूगे : सुभ दीवाळी हुकुम!
सांवलिया सेठ थारा भंडार भरे अर थारा बौपार में दिन दूणी, रात चौगुणी बरकत होवे।
राणा प्रताप री धरती री आन-बान अर दीवाळी री सान : दोनूं थारे जीवण में सदा रेवे।
चित्तौड़ रा किला ज्यूं मजबूत थारो परिवार, अर दीवा ज्यूं उजळो थारो संसार : दीवाळी री बधाई।
मायड़ रा हाथां सूं मांड्या मांडणा, बापूसा री पूजा री थाळी : आपणी दीवाळी री आ ई रीत निराळी।
हुकुम, आप पधारो तो म्हारी दीवाळी पूरी होवे : घणी खम्मा अर सुभ दीवाळी।
लिछमी माता थारे आंगणे पगल्या मांडे, अर रिद्धि-सिद्धि थारे घर में वास करे।
झीलां री नगरी सूं थाने झिलमिल दीवाळी री मंगळकामना!
मेवाड़ री माटी री सोरम, मीठा री मनवार : थारी दीवाळी होवे सगळा सूं न्यारी।
गणेस जी विघन हरे, लिछमी जी धन भरे, सरस्वती माता गियान देवे : सुभ दीवाळी।
ज्यूं दीवा री लौ नी डगमगावे, यूं ई थारो हौसलो कदी नी डगमगावे : दीवाळी री बधाई हुकुम।
घर रो कूणो-कूणो चमके, मन रो कूणो-कूणो हरखे : आ ई म्हारी कामना। सुभ दीवाळी!
मनवार री मिठाई, अपणायत री बात : मेवाड़ी दीवाळी री बात ई कई और है!
थारे घर धन री बरखा, मन में प्रेम री बरखा : दीवाळी मुबारक सा!
पुराणा बरस री सगळी चिंता दीवा में बळ जावे, अर नूंवो बरस नूंवो उजास लावे।
भायलां ने : मीठो खाजो, फटाका ध्यान सूं फोड़जो अर हंसता-खेलता रेजो! सुभ दीवाळी।
कुंभलगढ़ री भीत ज्यूं लांबी थारी उमर, अर उदियापुर री झीलां ज्यूं गेरी थारी खुसियां : दीवाळी री बधाई!
म्हां सगळा कानी सूं थाने अर थारा परिवार ने दीवाळी री घणी-घणी बधाई हुकुम!
दिवाळी की घणी-घणी बधाई सा! मां लक्ष्मी थांकै घर में सदा बिराजै।
गुलाबी नगरी सूं थांनै गुलाबी दिवाळी की राम-राम! थांको जीवण खुसियां सूं महकतो रैवै।
जौहरी बाजार की रोसणी जस्यो थांको भाग चमकै : सुभ दिवाळी!
गोविंद देव जी की किरपा सूं थांका घर में सुख-सांति को वास होवै।
मोती डूंगरी का गणेस जी थांका सगळा विघन हरै अर हर काम सिद्ध करै। दिवाळी की बधाई!
आमेर का किला जस्यो ऊंचो थांको मान, अर हवा महल जस्यो खुल्यो थांको मन होवै।
घेवर की मिठास, फीणी को स्वाद अर अपणां को साथ : दिवाळी की मीठी बधाई!
दीया को उजास थांका जीवण को सगळो अंधेरो दूर करै : सुभ दिवाळी सा।
थांको बौपार दिन दूणो, रात चौगुणो बढ़ै : लक्ष्मी जी थांका भंडार भरती रैवै।
रंगोळी का रंग, दीया की कतार : थांकै आंगणै आवै खुसियां की बहार।
बड़ा-बूढ़ा को आसीरवाद अर टाबरां की हंसी : या ही छै सांची दिवाळी।
सगळी नाराजगी भूल'र आज मिल बैठां : दिवाळी तो मेळ-मिलाप को त्योहार छै।
थांका सुपना दीया की लौ जस्या ऊंचा उठै अर पूरा होवै। दिवाळी की राम-राम!
नाहरगढ़ सूं देखो तो सारो जैपर दीयां सूं जगमगावै : थांको जीवण भी अस्यो ई चमकै।
खील-बतासा को भोग, लक्ष्मी-गणेस की पूजा : थांकै घर बरसै धन-धान की धारा।
भायला, पटाखा कम चलाज्यो अर मिठाई ज्यादा बांटज्यो! सुभ दिवाळी।
नूंवा कपड़ा, नूंवी उमंग, नूंवा सुपना : दिवाळी थांका जीवण में नूंवो रंग भरै।
एक दीयो उणां कै नांव भी जगावां जो आज आपणै सागै कोनी : यादां को उजास सदा रैवै।
हर बरस की नाईं ईं बरस भी थांकै घर लक्ष्मी जी का पगल्या मंडै अर सुख की बरखा होवै।
थांनै अर थांका सगळा अपणां नै दिवाळी की घणी-घणी राम-राम सा!
दिवाळी की घणी बधाई सा! मथुराधीस जी की किरपा थां पै सदा बणी रै।
चंबल की धार जस्यो थांको जीवण सदा बहतो रै अर खुसियां सूं भर्यो रै।
खड़ा गणेस जी थांका सगळा काज सिद्ध करै : सुभ दिवाळी!
बूंदी की बावड़ियां जस्यो गहरो थांको प्रेम, अर तारागढ़ जस्यो ऊंचो थांको मान होवै।
कोटा की कचौरी जस्यो करारो थांको जीवण, अर दिवाळी की मिठाई जस्यो मीठो थांको मन!
लछमी माता थांकै घर पधारै, सुख-संपत की बरखा करै : दिवाळी मुबारक।
थांका घर में दीयां की जगमग अर मन में सांति को उजास होवै।
कोटा पढ़बा आया टाबरां नै : घर सूं दूर छो, पण म्हांको आसीस थांकै सागै छै। सुभ दिवाळी!
सुपना पूरा करबा की लौ थांका मन में सदा जळती रै : ईं दिवाळी थांकी मैनत रंग लावै।
मुकंदरा का जंगल जस्यो हर्यो-भर्यो थांको परिवार होवै : दिवाळी की राम-राम।
नूंवा बही-खाता, नूंवी सुरुआत : थांका बौपार में लाभ ई लाभ होवै।
दिवाळी की रात लछमी जी थांको दरवाजो खटखटावै, बस थे दरवाजो खुल्लो राखज्यो!
बड़ा-बुजुर्गां का पगां में धोक, अर थांनै दिवाळी की राम-राम।
अंधेरो कतनो ई घणो होवै, एक दीयो काफी छै : थांकी हिम्मत भी अस्यी ई बणी रै।
भायला, मावा की मिठाई म्हांकै वास्तै बचा'र राखज्यो! सुभ दिवाळी।
दीयां की कतार, फूलां की बहार, अपणां को प्यार : या ई दिवाळी को सार छै।
झालावाड़ का संतरा जस्यो रसीलो थांको जीवण होवै : दिवाळी की बधाई सा!
गणेस जी बुध देवे, लछमी जी धन देवे, अर राम जी धीरज देवे : सुभ दिवाळी।
पटाखा की चमक, रोसणी की दमक : थांकी किसमत भी अस्यी ई चमकै।
म्हांकी आड़ी सूं थांनै अर थांका परिवार नै दिवाळी की घणी-घणी बधाई अर राम-राम सा!
खाटू स्याम जी री किरपा सूं थारै घर में खुसियां री दियाळी आवै : जय श्री स्याम, सुभ दियाळी!
हारै रो सहारो बाबो स्याम थारो सदा साथ देवे : दियाळी री घणी बधाई।
सालासर बालाजी थारा सगळा संकट हरै अर थारी हिम्मत बधावै : सुभ दियाळी सा!
सेखावाटी री रंगीली हवेलियां ज्यूं थारो जीवण रंगां सूं भरियो रैवै।
मंडावा री चितराम वाळी भीतां ज्यूं थारै भाग में सुख रा चितराम मंडता रैवै।
सेठां री धरती सूं थारै बौपार नै सेठाई री बधाई : लिछमी जी भंडार भरती रैवै!
जीण माता री किरपा थारै परिवार माथै सदा बणी रैवै : सुभ दियाळी।
फौजी भायां नै : थे सीमा माथै दीयो बण'र देस री रखवाळी करो, आखो देस थांनै नमन करै। दियाळी री राम-राम!
परदेस कमावण गया भायां नै : गांव री हवेली थांरी बाट जोवै, दियाळी माथै घरै आवज्यो।
धोरां में बाजरी री सोरम, आंगणै दीयां री जोत : म्हारी सेखावाटी री दियाळी री बात ई न्यारी।
थारो मन चूरू री रेत ज्यूं निरमळ अर थारो जीवण दीयै ज्यूं उजळो रैवै।
लाडू-मठड़ी री मनवार, अपणां रो प्यार : दियाळी री घणी बधाई थानै।
पढ़ाई-लिखाई में सेखावाटी आगै, थारा टाबर भी इयां ई आगै बढ़ता रैवै : सुभ दियाळी!
पुराणी हवेली में नूंवा दीया, पुराणै रिस्तां में नूंवो हेत : दियाळी सगळो नूंवो कर देवे।
स्याम बाबा रो निसाण अर लिछमी जी रो वरदान : दोनूं थारै घर सदा रैवै।
भायला, इण दियाळी फटाकां री जगां एक रूंख लगा : धरती भी थनै आसीस देसी!
दीयै री लौ ज्यूं सीधी अर ऊंचो थारो चरितर रैवै : दियाळी री राम-राम सा।
खेतां में फसल, कोठां में अनाज, घर में सुख रो राज : दियाळी थारै सारू मंगळमय होवै।
मां-बाप री सेवा में ई सांची लिछमी है : थारो घर इणी लिछमी सूं सदा भरियो रैवै।
म्हारै कानी सूं थारै आखै परिवार नै दियाळी री घणी-घणी बधाई अर नूंवै बरस री राम-राम सा!
Source note
About this collection
This webpage is based on the supplied five-page PDF containing 100 Diwali wishes grouped into Marwari, Mewari, Dhundhari, Hadoti and Shekhawati. The PDF's text layer separated some Devanagari vowel marks; those extraction artifacts were normalized against the rendered pages while preserving the wording and grouping.
